ग्वालियर। मध्यप्रदेश के के जिले से करीब 15 किलोमीटर दूर बसे गिरगांव में भगवान शिव का एक ऐसा दरबार लगता है, जहां सिर्फ पूजा ही नहीं बल्कि न्याय का भी गहरा विश्वास जुड़ा है। यहां विराजमान शिवलिंग को ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ के नाम से जाना जाता है।
ग्रामीणों की मान्यता है कि इस दरबार में सच्चाई की हमेशा जीत होती है और झूठ बोलने वाले को भगवान शिव स्वयं दंड देते हैं। यही कारण है कि यह मंदिर स्थानीय स्तर पर न्याय के प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुका है।
🔱 शिवरात्रि पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
महाशिवरात्रि के अवसर पर सुबह 4 बजे से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। दूर-दराज के गांवों और शहरों से श्रद्धालु जल, बेलपत्र और पूजा सामग्री लेकर दर्शन के लिए पहुंचे। भजन-कीर्तन और “हर-हर महादेव” के जयकारों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो गया।
🌿 चमत्कारिक प्रकट होने की मान्यता
ग्रामीणों के अनुसार यह प्राचीन शिवलिंग वर्षों पहले अचानक प्रकट हुआ था, जिसे चमत्कारिक घटना माना जाता है। तभी से यहां पूजा-अर्चना का सिलसिला लगातार जारी है। लोगों का विश्वास है कि जो भी सच्चे मन से यहां मुराद मांगता है, वह खाली हाथ नहीं लौटता।
⚖️ कसम के साथ होता है विवाद का निपटारा
‘मजिस्ट्रेट महादेव’ नाम के पीछे भी एक अनोखी परंपरा है। गांव में जब किसी विवाद या अपराध को लेकर संदेह होता है, तो पंचों की मौजूदगी में संबंधित व्यक्ति को शिवलिंग के सामने कसम दिलाई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां झूठी कसम खाने वाला भगवान के दंड से नहीं बच पाता। यही वजह है कि यहां का निर्णय अंतिम माना जाता है।
गिरगांव का ‘मजिस्ट्रेट महादेव’ मंदिर आस्था, परंपरा और सामाजिक विश्वास का अनोखा संगम है, जहां भगवान शिव को साक्षात न्यायाधीश मानकर पूजा जाता है।
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