नमस्कार, मैं हूँ अनिल शर्मा।
बात ग्वालियर की है। शहर के सागरताल इलाक़े में मंगलवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 साल का एक नौजवान—अभिषेक गौड़—मल्टी की सातवीं मंज़िल से नीचे गिरता है और मौके पर ही उसकी जीवन-लीला समाप्त हो जाती है। गर्गज कॉलोनी का रहने वाला अभिषेक अपने दोस्तों के साथ वहाँ पहुँचा था।
कहानी यहाँ ख़त्म नहीं होती... कहानी तो असल में यहाँ से शुरू होती है!
साथ गए दोस्तों का दावा सुनिए। दोस्तों का कहना है कि अभिषेक सातवीं मंज़िल पर बनी पानी की टंकी के पास बैठकर मोबाइल पर बात कर रहा था, और बात करते-करते अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वो नीचे जा गिरा।
लेकिन ठहरीए! ज़रा ठहरकर सोचिए...
अगर अभिषेक मोबाइल पर बात करते-करते नीचे गिरा, तो उसका मोबाइल कहाँ होना चाहिए था? ज़मीन पर... उसके साथ... टूटा हुआ? लेकिन पुलिस को मोबाइल कहाँ मिला? मोबाइल मिला ऊपर—उसी पानी की टंकी के पास, जहाँ बैठकर वो कथित तौर पर बात कर रहा था!
अब सवाल उठना लाज़िमी है। अगर कोई इंसान सातवीं मंज़िल से नीचे गिरता है, तो क्या मोबाइल अपने-आप टंकी के पास आराम से रखा रह जाता है?
इसी एक बात ने पूरी कहानी का रुख़ मोड़ दिया है। मृतक अभिषेक के पिता—नवल किशोर—और उनके पूरे परिवार ने साफ़ तौर पर हत्या की आशंका जताई है। परिजनों का सीधा आरोप है कि यह महज़ कोई हादसा नहीं है, बल्कि इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है।
पुलिस एक्शन में आई है। अभिषेक के साथ मौजूद तीनों दोस्तों को हिरासत में ले लिया गया है और बंद कमरे में पूछताछ चल रही है।
अब सवाल कई हैं:
* क्या यह वाकई एक लापरवाही और हादसे का मामला है?
* या फिर सातवीं मंज़िल की उस ख़ामोश छत पर दोस्तों के बीच ऐसा कुछ हुआ, जिसे छिपाने के लिए ‘हादसे’ की पटकथा लिखी गई?
* वो मोबाइल पानी की टंकी के पास किस हाल में और कैसे छूट गया?
पुलिस का कहना है कि वो घटना के हर पहलू—फॉरेंसिक साक्ष्य, मोबाइल की कॉल डिटेल और दोस्तों के बयानों की कड़ी से कड़ी जोड़कर जाँच कर रही है। सच क्या है, यह तो तफ़्तीश के बाद ही साफ़ हो पाएगा। लेकिन एक बात तय है—19 साल के एक लड़के की मौत के पीछे का यह 'सस्पेंस' अभी सुलझा नहीं है।
देखते रहिए, इस ख़बर पर हमारी नज़र लगा
तार बनी हुई है।



