डॉ. स्वयं प्रकाश गौड़ की कलम से
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आज बैंकिंग, खरीदारी, निवेश और भुगतान जैसी अधिकांश सेवाएं मोबाइल फोन की एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। डिजिटल क्रांति ने आम नागरिक के जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराध का एक ऐसा जाल भी तेजी से फैल रहा है, जिसमें अब केवल अनजान या कम पढ़े-लिखे लोग ही नहीं, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित और शिक्षित वर्ग भी फंसते जा रहे हैं।
ग्वालियर जैसे शहर में लगभग प्रतिदिन चार से पांच साइबर ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। यह संख्या केवल दर्ज मामलों की है, जबकि ऐसे अनेक लोग भी हैं जो बदनामी या झंझट के डर से शिकायत तक नहीं करते। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में ग्वालियर के चर्चित चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक विजयवर्गीय लगभग 21 करोड़ रुपये की ऑनलाइन निवेश ठगी का शिकार हो गए। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया और यह साबित कर दिया कि साइबर अपराधी अब बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ऑनलाइन ठगी का शिकार बनने वालों में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, वरिष्ठ अधिकारी, व्यवसायी और अन्य शिक्षित लोग भी शामिल हैं। ठग अब केवल लालच का सहारा नहीं लेते, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव, फर्जी निवेश योजनाएं, नकली वेबसाइटें, फर्जी ग्राहक सेवा नंबर, डिजिटल गिरफ्तारी जैसे नए हथकंडों का उपयोग कर लोगों का विश्वास जीत लेते हैं। कई बार पीड़ित व्यक्ति को तब तक यह एहसास नहीं होता कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है, जब तक उसकी जमा-पूंजी उसके खाते से निकल नहीं जाती।
तकनीक जितनी तेजी से विकसित हो रही है, अपराधी भी उतनी ही तेजी से अपने तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में केवल पुलिस या साइबर सेल के भरोसे इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। प्रत्येक नागरिक को डिजिटल जागरूकता अपनानी होगी। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतना, निवेश से पहले पूरी जानकारी की जांच करना, ओटीपी या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करना आज की आवश्यकता बन चुका है।
सरकार, बैंकिंग संस्थानों, शैक्षणिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को भी साइबर सुरक्षा को जनजागरूकता अभियान का हिस्सा बनाना होगा। जिस तरह सड़क सुरक्षा के लिए लगातार जागरूकता चलाई जाती है, उसी प्रकार डिजिटल सुरक्षा को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना समय की मांग है।
डिजिटल भारत का सपना तभी पूरी तरह सफल माना जाएगा, जब हर नागरिक डिजिटल रूप से सुरक्षित भी महसूस करे। तकनीक सुविधा का माध्यम बने, संकट का नहीं। इसलिए आज आवश्यकता केवल डिजिटल होने की नहीं, बल्कि डिजिटल रूप से सजग और सुरक्षित होने की है।
— डॉ. स्वयं प्रकाश गौड़

