ग्वालियर।
शीतला माता मंदिर पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे में 16 लोगों की मौत के बाद शहर में भारी वाहनों की आवाजाही और नो-एंट्री व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि बताया जा रहा है कि हादसे वाले दिन ही रात करीब 8 बजे एक और भारी ट्रक एंट्री पॉइंट को चकमा देकर शहर के बीचोंबीच पहुंच गया। पुलिस रेडियो पर अलर्ट मिलने के बाद पुलिस ने ट्रक का पीछा किया और उसे पकड़ लिया। दावा किया जा रहा है कि ट्रक का ड्राइवर और क्लीनर दोनों नशे में थे। ऐसे में सवाल उठता है कि जब भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, तो आखिर ट्रक शहर के भीतर तक पहुंच कैसे रहे हैं?
शीतला माता मंदिर हादसे ने पहले ही यातायात व्यवस्था और भारी वाहनों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की खबरें सामने आईं, लेकिन उसी दिन रात में दूसरे भारी ट्रक के शहर में दाखिल होने की घटना ने व्यवस्था की निगरानी पर फिर सवाल खड़े कर दिए। अब जरूरत सिर्फ कार्रवाई की नहीं, बल्कि यह पता लगाने की भी है कि एंट्री पॉइंट पर निगरानी में चूक कहां हुई और प्रतिबंधित मार्गों पर भारी वाहनों को रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी।
घायलों से मिलने पहुंचे सिंधिया, ग्रीन कार्पेट के सवाल पर दिया जवाब
इधर, शीतला माता मंदिर हादसे में घायल श्रद्धालुओं का हाल जानने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया रविवार शाम 5 बजे जयारोग्य अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्होंने घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज की जानकारी ली और बेहतर उपचार को लेकर जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उन्होंने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की बात भी कही।
अस्पताल में घायलों से मुलाकात के बाद पत्रकारों ने सिंधिया से ग्रीन कार्पेट को लेकर सवाल किया। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा— “मैं ग्वालियर का हूं, ग्वालियर मेरा है। मेरे लिए कहां से ग्रीन कार्पेट? क्या तमाशा है ये!” उनका यह बयान भी चर्चा में आ गया।
अब सवाल व्यवस्था से है
एक तरफ शीतला माता मंदिर हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों का दुख है, तो दूसरी तरफ उसी दिन रात में भारी ट्रक के शहर में घुसने की खबर ने नो-एंट्री व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है कि भारी वाहनों के प्रवेश पर निगरानी मजबूत हो और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब शीतला माता मंदिर जैसे दर्दनाक हादसे के बाद भी भारी ट्रक शहर के भीतर पहुंच रहे हैं, तो ग्वालियर की सड़कों पर आम लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर कौन निभा रहा है?

