ग्वालियर में अब बिजली कटौती सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि लोगों के गुस्से की वजह बनती जा रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में रोज़ाना घंटों बिजली गुल रहती है। बिजली कंपनी इसे “मेंटिनेंस” का नाम देती है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर ये मेंटिनेंस सिर्फ गर्मियों में ही क्यों याद आता है?
हालात ये हैं कि 4 घंटे की कटौती बताई जाती है, लेकिन बिजली 5 से 6 घंटे बाद लौटती है। इस भीषण गर्मी में लोग घरों में कैद होकर पसीने में तरबतर होने को मजबूर हैं। बच्चे परेशान, बुजुर्ग बेहाल और कामकाजी लोगों का पूरा रूटीन बिगड़ चुका है।
सबसे बड़ी दिक्कत तब होती है जब लोग जानकारी के लिए अधिकारियों को फोन लगाते हैं। न कोई फोन उठाता है, न कोई ये बताने को तैयार होता है कि आखिर बिजली कब तक आएगी। जनता अंधेरे और गर्मी दोनों से जूझती रहती है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों तक शायद ये परेशानी पहुंच ही नहीं रही।
अब सवाल ऊर्जा मंत्री पर भी उठ रहे हैं। ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाले ऊर्जा मंत्री से लोगों को उम्मीद थी कि शहर की बिजली व्यवस्था सुधरेगी, लेकिन लगातार बढ़ती कटौती पर उनकी चुप्पी लोगों को खटक रही है। जनता पूछ रही है कि जब अपने ही शहर के लोग परेशान हैं, तो आखिर जिम्मेदार लोग कब जागेंगे?
ग्वालियर की जनता अब पूछ रही है —
क्या बिजली कंपनी का मेंटिनेंस कभी पूरा होगा, या हर गर्मी में जनता इसी तरह पिसती रहेगी?
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