ग्वालियर । 09/06/2026 / द एक्सपोज़ एक्सप्रेस:
ग्वालियर के प्रतिष्ठित आईपीएस (IPS) कॉलेज के हॉस्टल से एक बेहद दिल दहला देने वाली और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहाँ नर्सिंग की ट्रेनिंग कर रही एक होनहार छात्रा नीलम प्रजापति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के बाद न सिर्फ कॉलेज परिसर में बल्कि पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। लेकिन इस मौत ने पीछे छोड़ दिए हैं कई ऐसे गंभीर सवाल, जिनका जवाब शायद अब हर कोई जानना चाहता है।
रात को बिगड़ी तबीयत, सुबह तक इंतज़ार क्यों?
जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से बिलौआ की रहने वाली नीलम प्रजापति महज 25 दिन पहले ही इस हॉस्टल में रहने आई थी। वह ओबीसी कोटे से 45 दिनों की नर्सिंग ट्रेनिंग कर रही थी। सहपाठियों की मानें तो वह अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर थी, आँखों में कई सपने थे।
बताया जा रहा है कि बीती रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी। लेकिन संवेदनशीलता और मुस्तैदी का दावा करने वाले हॉस्टल और कॉलेज प्रबंधन की तरफ से उसे समय पर उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। सवाल यह उठता है कि जब रात को छात्रा की हालत खराब थी, तो उसे तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया? सुबह जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गई, तब उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का फूटा गुस्सा: "हमें समय पर क्यों नहीं बताया?"
इस असमय मौत की खबर मिलते ही परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अस्पताल पहुंचे परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और उनका गुस्सा कॉलेज प्रबंधन पर फूट पड़ा है। परिजनों ने सीधे तौर पर कॉलेज प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
परिजनों का कहना है:"अगर रात को ही नीलम की तबीयत बिगड़ने की सूचना हमें दे दी जाती, तो हम रात में ही ग्वालियर पहुंच जाते। उसे किसी बड़े अस्पताल में बेहतर इलाज दिलाते, तो आज हमारी बेटी जिंदा होती। कॉलेज की लापरवाही ने हमारी बच्ची की जान ले ली।
जांच में जुटी पुलिस, पोस्टमार्टम का इंतज़ार
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा और मामले को संज्ञान में लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मौत की असली वजह क्या थी—क्या यह कोई बीमारी थी, कोई अंदरूनी समस्या थी या फिर इसके पीछे कुछ और है—यह सब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा। फिलहाल, पुलिस हॉस्टल के स्टाफ, वार्डन और कॉलेज प्रबंधन से लगातार पूछताछ कर रही है।
सुलगते सवाल: ज़िम्मेदार कौन?
यह घटना केवल एक छात्रा की मौत नहीं है, बल्कि उन हजारों माता-पिता के भरोसे पर एक गहरा आघात है जो अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य के लिए इन हॉस्टलों के हवाले करते हैं।
* जब कोई बच्चा हॉस्टल में रहता है, तो क्या उसकी सेहत की ज़िम्मेदारी प्रबंधन की नहीं होती?
* आपातकालीन स्थिति (Medical Emergency) के लिए हॉस्टल में क्या पुख्ता इंतजाम थे?
* क्या वाकई यह सिर्फ एक प्राकृतिक मौत है, या फिर व्यवस्था की लापरवाही से हुआ एक और हादसा?
द एक्सपोज़ एक्सप्रेस इस पूरे मामले पर अपनी नजर बनाए हुए है। सच क्या है, यह जांच के बाद सामने आएगा, लेकिन इस होनहार बेटी के जाने का दर्द और व्यवस्था पर खड़े हुए ये सवाल इतनी आसानी से शांत होने वाले नहीं हैं।
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