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गुप्तेश्वर पहाड़ी का सन्नाटा और मासूम की चीखें: गैंगरेप, हत्या और सबूत मिटाने की साजिश

 ग्वालियर की गुप्तेश्वर पहाड़ी, हैवानियत का वो खौफनाक मंजर जिसने पुलिसवालों की भी रूह कंपा दी!


उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की हवाओं में इस वक्त एक अजीब सी सिहरन है। एक ऐसी सिहरन, जो व्यवस्था के दावों पर सवालिया निशान लगाती है और समाज के भीतर छिपे बैठे उन भेड़ियों का क्रूर चेहरा सामने लाती है, जिन्हें हम और आप इंसान समझने की भूल कर बैठते हैं।


मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर का है। लेकिन इसकी तफ्तीश की तारें जुड़ती हैं भिंड जिले से। एक 15 साल की नाबालिग बच्ची। उम्र... सिर्फ 15 साल। जिस उम्र में हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने होने चाहिए थे, उस उम्र में उसे क्या मिला? धोखा, सामूहिक बलात्कार, मौत... और फिर उसकी पहचान को मिटा देने की एक खौफनाक साज़िश।


तारीख-दर-तारीख... कैसे बुना गया मौत का जाल?

पूरी कहानी को सिलसिलेवार तरीके से समझिए, क्योंकि यह सिर्फ एक अपराध की कहानी नहीं है, यह उस भरोसे के कत्ल की कहानी है जिसे बहला-फुसलाकर हासिल किया गया था।

 28 मई: भिंड जिले के मौ थाना क्षेत्र से एक 15 साल की नाबालिग छात्रा अचानक लापता हो जाती है। घरवाले परेशान होते हैं, रोते-बिलखते हैं। जब घर की तलाशी ली जाती है, तो एक सुराग हाथ लगता है। एक मोबाइल नंबर। यह नंबर था उसी इलाके के रहने वाले रामू गुर्जर का।

 28 मई (रात): परेशान परिजन मौ थाने पहुंचते हैं और रामू गुर्जर के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराते हैं। पुलिस एक्टिव होती है, जाल बिछाया जाता है।

 दबोचा गया रामू गुर्जर: पुलिस जब रामू गुर्जर को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ करती है, तो वो एक ऐसी कहानी उगलना शुरू करता है, जिसे सुनकर पुलिसवालों के पैरों तले से जमीन खिसक जाती है।

गुप्तेश्वर पहाड़ी: नवग्रह मंदिर के पास का वो सूनसान इलाका

रामू गुर्जर सिर्फ उस लड़की को भगाकर नहीं लाया था, वो उसे मौत के मुहाने पर ले आया था। ग्वालियर का जनकगंज थाना क्षेत्र। यहां एक पहाड़ी है—गुप्तेश्वर पहाड़ी। पास में ही नवग्रह का मंदिर है। सूनसान इलाका, जहां अमूमन लोगों की आवाजाही कम होती है।

रामू उस 15 साल की बच्ची को लेकर यहां पहुंचता है। लेकिन वो अकेला नहीं था। वहां पहले से मौजूद थे उसके दो दोस्त— सिकंदर कम्पू का रहने वाला अरुण कुशवाह और लक्ष्मीगंज का गौरव कुशवाह।

जो हुआ, वो रूह कंपा देने वाला था...

रामू गुर्जर और अरुण कुशवाह ने उस नाबालिग के साथ गैंगरेप किया। चीखती रही होगी वो बच्ची, गिड़गिड़ाई होगी, उन हैवानों के पैर पकड़े होंगे। लेकिन हवस की आग में अंधे हो चुके उन दरिंदों को तरस नहीं आया। जब मन भर गया, तो उन्हें डर सताने लगा कानून का। उन्हें डर सताने लगा पुलिस का।

पहचान मिटाने की खौफनाक साजिश

पकड़े जाने के डर से इन आरोपियों ने तय किया कि सबूत ही मिटा दिया जाए।

 1. हत्या: पहले उस 15 साल की मासूम की बेरहमी से हत्या कर दी गई।

 2. शव को जलाया: हत्या के बाद बाजार से पेट्रोल लाया गया। शव पर पेट्रोल छिड़ककर उसे आग के हवाले कर दिया गया, ताकि लाश की शिनाख्त न हो सके और पुलिस कभी उन तक पहुंच ही न पाए।

पुलिस की कार्रवाई: ऑन द स्पॉट इनवेस्टिगेशन

भिंड की मौ थाना पुलिस जब रामू गुर्जर के कबूलनामे के बाद ग्वालियर पहुंचती है, तो स्थानीय जनकगंज थाना पुलिस को साथ लिया जाता है। पुलिस की गाड़ियां गुप्तेश्वर पहाड़ी पर पहुंचती हैं। मौके से पुलिस को उस बच्ची का अधजला शव बरामद होता है।

पुलिस ने तुरंत दोनों स्थानीय आरोपियों— अरुण कुशवाह और गौरव कुशवाह को भी दबोच लिया। तीनों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल, ग्वालियर के जनकगंज थाना पुलिस ने इस मामले में 'जीरो पर कायमी' (Zero FIR) करके केस डायरी भिंड के मौ थाना पुलिस को सौंप दी है, क्योंकि मूल अपराध वहीं दर्ज था। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में हत्या, गैंगरेप और पोक्सो एक्ट (POCSO) की और भी सख्त धाराएं जोड़ी जाएंगी।

लेकिन सवाल वही बुनियादी है। क्या सिर्फ धाराएं बढ़ा देने से, या आरोपियों को पकड़ लेने से उस मां-बाप का कलेजा ठंडा होगा जिसने अपनी 15 साल की फूल जैसी बच्ची को खो दिया? क्या हमारी पुलिसिंग इतनी मजबूत नहीं हो सकती कि ऐसे अपराधियों के मन में वारदात को अंजाम देने से पहले कानून का खौफ पैदा हो?

इस मामले की हर अपडेट पर हमारी नजर बनी रहेगी। आप देखते रहिए।

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